Home अपना गांव उत्तरी मैदानों में स्ट्रॉबेरी खाने के लिए सुरक्षित किसान उठा रहे इसका...

उत्तरी मैदानों में स्ट्रॉबेरी खाने के लिए सुरक्षित किसान उठा रहे इसका फायदा

उत्तरी मैदानों में स्ट्राबेरी कीटनाशक मुक्त

उत्तरी मैदानों में स्ट्रॉबेरी खाने के लिए सुरक्षित हैं

लखनऊ।अमेरिका में स्ट्रॉबेरी को कीटनाशक भरपूर माना जाता हैऔर 2018 डर्टी डोजेन फ्रूट की सूची में सबसे ऊपर है।अमेरिका में पर्यावरण कार्य समूह (EWG) ने अपनी पद्धतिके अनुसार कीटनाशक अवशेषों के उच्चतम और निम्नतमस्तर दोनों की एक अद्यतन सूची जारी की। रिपोर्ट पहले केवर्षों के समान दुर्भाग्य से स्ट्रॉबेरी नंबर एक स्थान का दावाकरती है।

 

 यह कई देशों में चिंता का विषय है जहां कीटनाशकका उपयोग स्ट्रॉबेरी उत्पादन के लिए बहुत अधिक है औरबाज़ार में बेचे जाने वाले फलों में रसायनों का अवशेष रहताहै। संक्षेप में यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संगठित स्ट्रॉबेरी के बाज़ार में कीटनाशक अवशेस के महत्व को इंगित करता है।

सौभाग्य से, उत्तर भारत के मैदानों  में उत्पादित स्ट्रॉबेरी ऐसीपरिस्थितियों का सामना नहीं करती है| सर्दियों के दौरान पैदाहोने के कारण कीटों का हमला न्यूनतम होता है और बीमारीभी कम लगती है। यह जलवायु रसायनों  के उपयोग के बिनास्ट्रॉबेरी उत्पादन में किसान की मदद करती है। हालांकि,कभी-कभी पौधा लगते समय कवकनाशी का उपयोग कियाजा सकता है इससे पहले कि फसल तुड़ाई के लिए तैयार हो,रसायन  विघटित हो जाता  है।

 

 यह सब बताता है कि स्ट्रॉबेरीका जैविक उत्पादन इस दशा में आसान है| जैविक उत्पादनलिए अमेरिका के  स्ट्रॉबेरी उपभोक्ताओं बहुत अधिक कीमतका चुकानी पड़ती  है। स्ट्रॉबेरी का जैविक उत्पादन उनकीजलवायु और बदलती  परिस्थितियों में मुश्किल है। व्यवस्थितरूप से उगाए गए स्ट्रॉबेरी उपोष्ण उत्तर भारत में उत्पादकों केलिए उच्च लाभ के साथ एक नया बाजार खोल सकती  हैं।

पहले  स्ट्रॉबेरी को पहाड़ों  के लिए उपयुक्त फसल माना जाताथा, लेकिन अब यह उपोष्ण उत्तर भारत में अच्छी तरह सेअपनाई गई फसल है जहाँ इसकी व्यावसायिक खेती हो रहीहै। फसल ठंडी जगहों पर प्रचलित है लेकिन उत्तरी मैदानों मेंउत्पादित फल ठन्डे  क्षेत्र के फलों से कम नहीं हैं। दिलचस्प हैकि फल अधिक मीठे, आकार में बड़े होते हैं और फल कीअधिक उपज ले सकते हैं।

स्ट्रॉबेरी उगाने में सीआईएस द्वारा किसानो के खेत में प्रयोगकरके पाया गया कि वे एक हेक्टेयर से लगभग 8 से 10लाख रुपये का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावासबसे महंगा लगत घटक, रोपण सामग्री जिसमें 3 से 6 लाखप्रति हेक्टेयर खर्च हो सकता है और 3 लाख का अन्य खर्चकरके स्ट्रॉबेरी की खेती से बहुत आकर्षक लाभ प्राप्त करसकते हैं ।

संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार ने स्ट्रौबरीउगाने में किसानों की तकनीकी मदद की क्योंकि उन्हें इसफसल पर  सिक्किम की दशाओं में शोध करने का अनुभवथा|  उन्होंने कई तकनीकी यों को लखनऊ की स्थिति केअनुसार संशोधित किया| इसमें यहां की दशाओं के लिएउपयुक्त किसानों की पहचान और  पौध सामग्री का उत्पादनकी तकनीकी प्रमुख हैं| रोपण सामग्री को खरीदने में किसानोंको लाखों रुपए का व्यय करना पड़ता है| कम लागत मेंकिस तरह से यह सामग्री किसान अपने खेत में बना सके इसपर उनके सहयोग से  संस्थान अनुसंधान कर रहा है | स्ट्रॉबेरीउत्पादकों के अलावा कई उद्यमी भी से लाभान्वित होंगेक्योंकि स्थानीय स्तर पर रोपण सामग्री के उत्पादन हो जानेपर उन्हें इसके लिए दूरस्थ पहाड़ो पैर जाही जाना पड़ेगा साथही साथ  खेती की लागत में भी कमी होगी|