गंगा दशहरा यानी गंगा का पृथ्वी पर अवतरण का दिन

गंगा दशहरा यानी गंगा का पृथ्वी पर अवतरण का दिन ।

धर्म की नगरी वाराणसी में गंगा दशहरा से बड़ा कोई पर्व नही होता है। क्योंकि आज ही के दिन भगीरथ के घनघोर तपस्या के पश्चात भोले नाथ की जटाओं से निकल कर गंगा की पावन बूंदे सगर के 60 हज़ार पुरखो को तारने के लिए इस धरा धाम पर आई थी।

तब से लेकर आज के दिन तक गंगा अनवरत रूप से न सिर्फ हमें जीवन प्रदान करती है बल्कि मोक्ष भी प्रदान करती है।
काशी भी मोक्ष की नगरी है यह शंकर की नगरी भी है इसलिए गंगा का काशी के लिए खास महत्व है। यही कारण है कि आज के दिन गंगा में स्नान और दान का महत्व है।

काशी वासी सुबह सबेरे गंगा स्नान करके बाबा विश्वनाथ का दर्शन करते है। मान्यता है कि आज के गंगा स्नान करने से मनुष्य को 10 पापों से मुक्ति मिल जाती है।