केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमान खेडा में ढीगरी और दूधिया मशरूम खेती बढायेगी किसानों की आमदनी

राजधानी लखनऊ के हरदोई रोड इस्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा में बटन मशरूम का उत्पादन राजधानी क्षेत्र में लंबे समय से किया जाता रहा है जिससे किसानों को नवंबर माह के अंत से फरवरी माह के मध्य तक रोजगार प्राप्त होता है ।अन्य महीनों में मशरूम उत्पादन रोजगार के दूसरे साधनों पर निर्भर रहते हैं ।वर्षभर मशरूम से रोजगार प्राप्त करने के लिए मौसम के अनुसार विभिन्न मशरूम उत्पादन आवश्यक है।

केंद्रीय उपोषण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा लखनऊ के निदेशक डॉक्टर शैलेंद्र राजन के अनुसार धीरे-धीरे किसानों के बीच मशरूम उत्पादन रोजगार के एक नए साधन के रूप में लोकप्रिय हो रहा है पिछले शीतकालीन में लखनऊ के नबी पनाह कसामंडी कला और मोहम्मद नगर तालुके दारी के अनेक बागवानों ने बटन और आयस्टर (ढींगरी) मशरूम की खेती की। संस्थान के आस-पास के क्षेत्रों के साथ-साथ महान अमेठी हरदोई सीतापुर और लखनऊ के अनेक मशरूम उत्पादक वर्ष भर उत्पादन हेतु अग्रसर हैं। मोहन के श्री अटल बाजपेई ने मशरूम उत्पादन से 5.0 लाख से अधिक का लाभ प्राप्त किया तथा मशरूम उत्पादन का प्रारंभ कर रहे लखनऊ क्षेत्र के अधिकांश उत्पादकों ने इसे खाया और अपने गांव के अन्य लोगों को खिलाया। आने वाले समय में या लोग ग्रीष्मकालीन दूधिया मशरूम की खेती के लिए तैयारी कर रहे हैं विगत 2 वर्षों में भी विधि मशरूम उत्पादन हेतु जागरूकता प्रसार में अच्छी सफलता प्राप्त हुई है संस्थान द्वारा मौसम के अनुरूप वर्षभर मशरूम की विभिन्न प्रजातियों का बीज (इस्पान) उपलब्ध कराया जा रहा है।

आशा है कि आगामी 1-2 वर्ष में लखनऊ में ढीगरी और दूधिया मशरूम की उपलब्धता फरवरी से नवंबर माह के मध्य प्राप्त होने लगेगी।
शाकाहारी लोगों के लिए मशरूम प्रोटीन का सर्वश्रेष्ठ स्रोत है लखनऊ और आसपास के जिलों में बटन मशरूम की उपलब्धता नवंबर माह के अंत से फरवरी माह के मध्य तक रहती है अन्य महीनों में उपभोक्ता मशरूम नहीं पाते वर्ष भर बाज़ार में मशरूम की उपलब्धता बनाए रखने के लिए मौसम के अनुसार विधि मशरूम उत्पादन आवश्यक है।

संस्थान के मशरूम वैज्ञानिक डॉक्टर प्रभात कुमार शुक्ल के अनुसार लखनऊ क्षेत्र से लगभग 5000 कुंटल बटन मशरूम उत्पादन प्राप्त होता है और अगर सभी मशरूम उत्पादन साथ दे तो भीष्म और वर्षा काल में हजारों कुंतल दूधिया और लिंगरी उत्पादन की संभावना है इन दोनों ही प्रकार के मशरूम का बीज इच्छुक उत्पादक हमेशा प्राप्त कर सकते हैं तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध है।

दूधिया और ढींगरी मशरूम की खेती के लिए कंपोस्ट की आवश्यकता नहीं होती है इसके लिए गेहूं के भूसे को गर्म पानी में रसायन (कार्बेंडाजिम+फार्मलीन) द्वारा उपचारित कर भूसे की उचित नमी की अवस्था पर बीज मिलाया जाता है । इस ताखों (ट्रे) में बिछाने की बजाए पालीप्रोपेलीन की थैलियों में 3 – 4 किलोग्राम भार की बेड तैयार करते हैं । विजाई करने के 30 – 35 दिन के बाद उत्पादन प्रारंभ हो जाता है और 40 से 60 दिन तक मशरूम प्राप्त होता है लगातार उत्पादन प्राप्त करने के थोड़े- थोड़े अंतराल पर विजाई करते हैं।

गुणवत्ता की दृष्टि से सभी प्रजातियां लगभग एक जैसी ही होती हैं सभी में शुष्क भार के अनुसार 20 – 40% तक सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता की प्रोटीन होती है मशरूम में कार्बोहाइड्रेट वसा और कैलोरी की मात्रा का कम और रेशा तथा खनिज का अधिक पाया जाना इसे हृदय रोग एवं मधुमेह के रोगियों के लिए उत्तम आहार बनाता है।