यूपी सरकार एक साल में जनता की सिर्फ लॉलीपॉप दिया ,अखिलेश यादव

लख़नऊ ,,
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बने 19 मार्च 2018 को एक वर्ष पूरा हो गया है। ‘एक साल में नई मिसाल‘ के दावे तो बड़े-बड़े किए गए लेकिन जमींनी हकीकत पर एक भी दावा नहीं ठहर सका है। झूठ बोलने में यह आत्मविश्वास गजब का है। भाजपा सरकार के पास वस्तुतः एक वर्ष में अपना काम गिनाने के नाम पर कुछ भी नहीं है।

पूरे वर्ष भाजपा सरकार समाजवादी सरकार के कामों की नुक्ताचीनी तो करती रही परन्तु वास्तव में उनकी योजनाओं को अपना बताती भी रही और उद्घाटन का उद्घाटन करती रही। समाज का हर वर्ग अपने को ठगा महसूस कर रहा है। किसान, नौजवान, अल्पसंख्यक, महिला, व्यापारी, गरीब सभी में इस सरकार के कामकाज से गहरा असंतोष और आक्रोश है, इसका गोरखपुर-फूलपुर के लोकसभा उपचुनावों के नतीजों से ही प्रमाणित होता है।
समाजवादी सरकार ने 23 महीनों में 302 किलोमीटर की आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे बना दी और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की नींव डाल दी।

भाजपा सरकार ने कोई निर्माण तो किया नहीं, इन्वेस्टर्स मीट में एक्सप्रेस-वे का प्रचार कर उद्यमियों को लुभाती रही। उद्यमी आए और कागजी समझौता करके चले गए। मुख्यालयों से जोड़ने के लिए फोरलेन सड़कों का जाल समाजवादी सरकार ने बिछाया। एक वर्ष की अवधि में भाजपा सरकार ने एक यूनिट बिजली भी उत्पादित नहीं की। समाजवादी सरकार ने महानगरों में 24 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की थी उसको ही भाजपा की राज्य सरकार बतौर मिसाल दुहरा रही है।
किसानों की कर्जमाफी करने का शोर मचाकर भाजपा सत्ता में तो आ गई लेकिन किसानों को धोखा ही हासिल हुआ। 86 लाख किसानों की कर्जमाफी कुछ रूपयों में निबटा दी गई यह भी एक मिसाल है। किसानों की आय दुगनी करने का कोई रोडमैप आज तक सामने नहीं आया। दर्जनों किसानों ने भाजपा सरकार में आत्महत्या कर ली है। किसान बदहाल है उसको फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाया। गन्ना किसानों का बकाया आज तक पूरा भुगतान नहीं हुआ और ना ही विलम्ब का ब्याज मिला।

भाजपा ने नौजवानों की जिंदगी से तो सबसे बुरा खेल खेला है। उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार ने नौकरियां छीन लेने का रास्ता अपनाया। शिक्षामित्र, बीटीसी प्रशिक्षु, पुलिस-पीएसी की जो नियुक्तियां होनी थी, वे भी रूक गई। भाजपा बेरोजगारों की फौज बना रही है। जबकि समाजवादी सरकार ने 10 लाख नौकरियां दी थी।
भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। कानून व्यवस्था की स्थिति में सुघार तो दूर आए दिन लूट, हत्या, अपहरण की घटनाओं की बाढ़ आ गई हैं। महिलाएं यहां तक बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाओं में इजाफा हो गया। प्रदेश में जंगलराज है। समाज विरोधी तत्व सक्रिय हैं।
समाजवादी सरकार के समय महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1090, प्रसूतावस्था में अस्पताल लाने ले जाने के लिए 102, नं0 एम्बूलेंस सेवा शुरू की थी। अपराध नियंत्रण के लिए यूपी 100 डायल सेवा शुरू की जिसकी प्रषंसा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हुई। भाजपा ने इस सबको अपनी सनक में बर्बाद कर दिया। राजधानी लखनऊ में खूबसूरत रिवरफ्रंट बना था वहां अब धूल उड़ रही है। रंगीन फब्वारे बंद पड़े हैं। जनेश्वर मिश्र जैसे शानदार पार्क की उपेक्षा की जा रही हैं। गिट्टी, मौरंग की मंहगाई से निर्माण कार्य ठप्प है।
आंगनबाड़ी और रसोईयांे को जीवन निर्वाह लायक वेतन मांगने पर लाठियों से पीटा गया। छात्र-छात्राओं को समाजवादी सरकार ने लैपटाप बांटे, भाजपा सरकार ने चुनावी वादे में इसे जारी रखने को कहा था, एक वर्ष में एक लैपटाप तक नहीं बांट सके। स्वास्थ्य सूचना सेवा का दिवाला पिट गया। अस्पतालों की व्यवस्था बजट और निरीक्षण के अभाव में चरमराई हुई है। गरीबों को इलाज और दवा नहीं मिल रही है। घायलों को अस्पताल लाने वाली 108 समाजवादी एम्बूलेंस सेवा बर्बाद हो चली है। समाजवादी शब्द से चिढ़ के नाते गरीब महिलाओं को मिलने वाली पेंशन योजना भी बंद कर दी गई हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को न तो लोकतंत्र में और नहीं संविधान में विश्वास है जिसकी शपथ लेकर वे पदारूढ़ हुए सांप्रदायिकता की राजनीति करने वाली भाजपा समाज को बांटने का काम करती है और विभिन्न समुदायों के रिश्तों में जहर घोलती है। जातिवादी और साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ जब धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील ताकतें एक हुई तो भाजपा में हताशा और घबराहट फैल गई है। सŸाारूढ़ दल के मुखिया सपा-बसपा के चुनावी तालमेल पर उंगली उठाने लगे है। ईवीएम मशीनों के जरिए भाजपा ने चुनावों की निष्पक्षता को ही प्रभावित कर दिया है। भाजपा द्वारा सŸाा और सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग लोकतंत्र को करने की नीयत रहती है।
एक वाक्य में कहा जाय तो भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। एक वर्ष की अवधि में उसने कुछ ऐसा नहीं किया जिसे गिनाया जा सके। अपने दावों पर अच्छा होता भाजपा ‘श्वेतपत्र ‘ ले आती। नई मिसाल के नाम पर पुरानी बातें दुहराने से क्या फायदा? हां दिल बहलाने को भाजपा का ख्याल अच्छा है। राज्य की जनता ने भाजपा सरकार का आंकलन कर लिया है कि यह सरकार तो पूरी तरह अकर्मण्यता की शिकार है। जनता इससे निजात पाने को व्याकुल है। अब राज्य भर में सच्चाई पर चर्चा चैराहे-चैराहे हो रही है।
(राजेन्द्र चौधरी)
मुख्य प्रवक्ता